Tuesday, 30 October 2012

Shiromani Kavi Pandit Mange Ram Sangi

शिरोमणि कवि पंडित मांगेराम द्वारा रचित सांग"क्रष्ण-सुदामा"में से ये रागनी ली गयी है!
जब सुदामा के घर पर अनाज नही रहता है तो सुदामा की पत्नी सुशीला उसे क्या कहती है---

यज्ञ,हवन,तप,दान,करे तै लोग हंसाई होगी !
दो मुटठी ना दाणे घर म्ह कती सफाई होगी !!टेक!!

अगत का सामान करया था,
आत्मा का ज्ञान करया था,
हरिचंद नै दान करया था,कोड तबाई होगी !!1!!
दो मुटठी ना दाणे घर म्ह कती सफाई होगी !!टेक!!

अपणा हिरदा नर्म करे तै,
सबके दिल म्ह भर्म करे तै ,
नल राजा के कर्म करे तै,भौम पराई होगी !!2!!
दो मुटठी ना दाणे घर म्ह कती सफाई होगी !!टेक!!

पंचा म्ह पकड़या पल्ला,
कोन्या करया राम नै भला,
गौतम ऋषि की नार अहल्या,सती लुगाई होगी !!3!!
दो मुटठी ना दाणे घर म्ह कती सफाई होगी !!टेक!!

पांच आदमी तेरे सहारै,
क्यूँ ना साजन बख्त बिचारै,
मांगेराम सांग के बारै,सफल कमाई होगी !!4!!

copyright 2012
All right reserved


Sunday, 28 October 2012

Shiromani Kavi Pandit Mange Ram Sangi

 शिरोमणि कवि पंडित मांगेराम जी द्वारा रचित सांग"चन्द्रहास "में से ये रागनी ली गयी है !


जब दीवान चन्द्रहास को मारने की साजिश दुबारा करता है और मन्दिर में जल्लादों को बैठा देता है क्योंकि जब चन्द्रहास और विषिया दोनों पूजा करने जायेंगे !वहीं पर चन्द्रहास का सिर धड़ से अलग कर देंगे !पर वहां पर उनसे पहले विषिया का भाई  मदन वहां पहुंच जाता है और जल्लाद उसी को चन्द्रहास समझ कर उसका  कत्ल कर देते हैं जब चन्द्रहास और विषिया मन्दिर में पहुंचते हैं तो विषिया अपने भाई को मरा देख क्या कहती है और पंडित मांगेराम जी ने क्या लिख दिया-


रोऊँ बरसै नैनां तै नीर !
माँ के जाए बोलिए रे मेरे बीर !!टेक!!


मुख चुमुं,करूं लाड मदन का !
खून सूख ग्य़ा तेरे बदन का !
कौण बंधावै मेरी धीर !!1!!
माँ के जाए बोलिए रे मेरे बीर !!टेक!!


कौण बाहण के लाड करेगा !
माँ-जाई के कौण भात करेगा !
कौण उढावे दखणी चीर !!2!!
माँ के जाए बोलिए रे मेरे बीर !!टेक!!


तन म्ह होग्यी कौण बिमारी !
कित लाग्गी तेरै छुरी-कटारी !
कित सी लाग्या तीर  !!3!!
माँ के जाए बोलिए रे मेरे बीर !!टेक!!


मांगेराम नै ल्याओ बुलाकै !
संजीवनी बूटी ज्यागा पिला कै !
हो ज्यागा अमर शरीर !!4!!

Copyright 2012(c)
All right reserved


Friday, 26 October 2012

Shiromani Kavi Pandit Mange Ram Sangi

शिरोमणि कवि पंडित मांगेराम द्वारा रचित साँग "ध्रुव का जन्म(ध्रुव भक्त)"में से ये रागनी  ली गयी है!

वार्ता:जब नारद जी रानी सुनीति  को कहते हैं कि आपकी वंश बेल तब चलेगी जब आप अपने पति की दूसरी शादी करवाओ !इतना कहकर नारद जी महल से चले जाते  हैं!तो रानी सुनीति  राजा उतानपाद से कहती हैं कि आप दूसरी शादी करवा लो तभी हमारी वंश बेल चलेगी पर राजा उतानपाद मना कर देते हैं तो रानी उन्हें  कहती है और पंडित मांगेराम जी ने लिख दिया --------------


नारद के बोल मेरे हृदय समाए हो !!टेक!!

मेरे कहे तै ब्याह करवाले तन की कली खिलैगी !
जब म्हारे अगत बेल चलेगी,माया मिलैगी,
होंज्या मन के चाहे हो !!1!!
नारद के बोल मेरे हृदय समाए हो !!टेक!!

बीर मर्द का मेल बण्या रहै धूर के साथ इसे हों !
त्रिलोकी के नाथ इसे हों,हाथ इसे हों,
जिन तै बाग  लुआए हों !!2!!
नारद के बोल मेरे हृदय समाए हो !!टेक!!

कदे भी ना झूठी जा इन म्हं-ऋषियों की बाणी !
तूं राजा मैं राणी,म्हारी उमर पुराणी,
हम सां खाए कुमाए हो !!3!!
नारद के बोल मेरे हृदय समाए हो !!टेक!!

बेटे बिन मुक्ति ना मिलती चाहे लाख बर्ष तक जी ले !
गुरु लख्मीचंद के छन्द रसीले,गडरे  सै कील्ले .
कोन्या हिलते हीलाए हो !!4!!
नारद के बोल मेरे हृदय समाए हो !!टेक!!

इस रागनी में पंडित मांगेराम जी ने अपने गुरु का ही नाम लिया है !

copyright 2012(c)
All right reserved

Sahil Kaushik,
Mobile+919813610612




Sunday, 14 October 2012

Shiromani Kavi Pandit Mange Ram Sangi

शिरोमणि कवि पंडित मांगे राम जी  ने ग्रामीण समाज में फैली हुई कुरुतियाँ जैसे नशे के आदि होना,बड़े बुजुर्गों का अपने परिवार को अपने स्वार्थ के लिए तोडना तथा पति-पत्नी एक छत के नीचे एक दुसरे के प्रति षड्यन्त्र रचना,उनके उपर करारी रचना लिखी है!और सभी को नशा ना करने के लिए प्रार्थना की है वो भी करबद्ध!
दया धर्म सब जा लिए,जा लिए दीन ईमान !!टेक!!जमाने तने के करी.किसे रंग दिखाए हो .............


बीर-मर्द आपस के मांह धोखा करके करते बात !एक जगहां  रहणा-सहणा काम करै दिन-रात !न्यारी-न्यारी गाँठ सबकी खाणा-पिणा  एक साथ !बाबू बोल्या छोरे सेती लेरया सूं भतेरा माल !मेरी गेल्याँ न्यारा होइए,खूब द्यूंगा लते चाल !फागण म्ह तने घी दे द्यूंगा,छोरे गेल्याँ करिये आळ !छोरा-बहू न्यू बहका लिए,या बूढ़े तेरी शान !!१!!जमाने तने के करी.किसे रंग दिखाए हो .............


दया धर्म सब जा लिए,जा लिए दीन ईमान !!टेक!!


बेटी चाहवे माँ की गेल्याँ लुट लेज्याँ सारे घर नै !भाई-भावज दोनों रोवें पीट-पीट अपने सिर नै !पिहिरयाँ पै माळ लेके राजी राखे ब्याहे वर नै !ब्याहा वर तै सुल्फा पीवै,बेच खाई सारी टूम !किसे तै भी बोले कोन्या एकला फिरे जा सूम !आठ जगहां  तै लते जळ रहे टोटे नै मचाई धूम !कासण बेच कै नै खा लिए,फिर चा की करी दुकान !!२!!जमाने तने के करी.किसे रंग दिखाए हो .............दया धर्म सब जा लिए,जा लिए दीन ईमान !!टेक!!


बीडी-चाए,पान बेचे सबते बोले करके प्यार !महीने म्ह दिवाला लिकड़ा उसने पीगे मिन्त्र-यार !पिसे मांग्ये जूत बाज्या सारी बाकी रही  उधार !महीने भीतर घर नै आग्या एक लिया ङांडा मोल !२० बीघे धरती बोई,बीज गेरया तोल तोल !सुल्फा पीकै पड़ के सोग्या,धंधा लिया चोरां नै खोल !गधा तलक भी बहा लिए,फेर पागल कहै जहान !!३!!जमाने तने के करी.किसे रंग दिखाए हो .............दया धर्म सब जा लिए,जा लिए दीन ईमान !!टेक!!


ब्याही बीर घर नै छोड़ी,बोहरियाँ का टोह्या मठ !भगमा बाणा कान पड़ाय़े,एक कीकर का ठाया लठ !दिए माई-दिए माई,गोरै जा लगाया भठ  !बालकपण म्ह बिगड़ होग्या,सोने का बणाया रांग !लख्मीचंद नै देख देख इस दुनिया का बणाया सांग !मांगेराम हाथ जोड़े छोड़ दियो नै सुल्फा भांग !गंगा जी से नहा लिए,म्हारा बसियो हिंदुस्तान!!४!!जमाने तने के करी.किसे रंग दिखाए हो .............दया धर्म सब जा लिए,जा लिए दीन ईमान !!टेक!!

Copy right 2012(c)
All right reserved


Shiromani Kavi Pandit Mange Ram Sangi

शिरोमणि कवि पंडित मांगेराम जी द्वारा रचित "क्रष्ण-सुदामा"नामक सांग में से एक रागनी जो उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पिस्ता देवी जी की इच्छा के अनुसार आपके सामने प्रस्तुत की जा रही है!

जब सुदामा अपनी गरीबी को दूर करने के लिए श्री क्रष्ण जी के पास पहुंच जाते है परन्तु उनके मित्र होने के कारण वे अपनी दशा को प्रदर्शित नही कर पाते और शर्म के कारण वो अपने मन के भाव प्रकट नही कर पाते!पर श्री क्रष्ण जी को पता था और वे उनको रात को अपने महल में सुला कर उनके लिए एक नया महल बनवा देते है और वे सुदामा को नही बताते है!                         जब सुदामा वापिस अपने घर आता है तो अपनी झोपडी की जगह उस महल को देख कर दंग रह जाता है और सुशीला पर भड़क जाता है तो सुशीला बांदी से क्या कहती और पंडित मांगेराम जी ने उनकी बात इस प्रकार प्रकट की-मेरा बाहर खडया भरतार,हुए दिन चार दिखाई  देग्या !मैं करया करूं थी शर्म सच्चाई देग्या !!टेक!!


मैं देख्या करती बाट,दिया फंद काट क्रष्ण काले नै !चीणा दिए ऊँचे महल बृज आले नै !पाट गया सै तोल,गया सै खोल कर्म ताले नै !मैं ओट्या करती रोज सर्द पाले नै !दिए दुशाले बीस,गदेले तीस,रजाई देग्या !!१!!मैं करया करूं थी शर्म सच्चाई देग्या !!टेक!!


आनन्द होग्या आज,भतेरा नाज घरां कोठया म्ह !आटा बेसन चुन धरया कोठया म्ह !घी शक्कर गुड़ खांड,दोहरे टांड भरया कोठया म्ह !मिर्च तेल और नूण निरा कोठया म्ह !कदे मिलै नही था टूक,मेट दी भूख,मिठाई देग्या !!२!!मैं करया करूं थी शर्म सच्चाई देग्या !!टेक!!


चाँदी सोने के ढेर,नही सै छेर भरी अलमारी !मैं सब ढालां की टूम पहरल्यूं सारी !हीरे,पन्ने,मणी,महल म्ह कणी भतेरी आरयी !बैठे बीस मुनीम भरैं सै डायरी !त्रिलोकी भगवान,करड़ा धनवान,कमाई देग्या !!३!!मैं करया करूं थी शर्म सच्चाई देग्या !!टेक!!


गुरु लख्मीचंद की गेल,मिला कै मेल गुजारा होग्या !चरणा के मांह ध्यान हमारा होग्या !मांगेराम,सुबह और शाम नजारा होग्या !क्रष्ण जी का दर्श दुबारा होग्या !मेरे कर्म के भोग,काट दिए रोग,दवाई देग्या !!४!!मैं करया करूं थी शर्म सच्चाई देग्या !!टेक!!
copyright 2012(c)

                                                                     all right reserved 


Shiromani Kavi Pandit Mange Ram Sangi


शिरोमणि कवि पंडित मांगेराम जी ने १५ अगस्त  १९४७ के बाद राजनीति का एक बहुत बुरा पक्ष देखा!सत्ता के लिए लीडरों की भाग दौड़ शुरू हो गयी थी !हर कोई नेता बनने के चक्कर में रहता !वे सभी नये लीडर,श्री भगत सिंह,आजाद,लक्ष्मीबाई,सुभाष चन्द्र बोस,महात्मा गाँधी,पंडित जवाहरलाल नेहरु के बलिदानों को भूल कर सत्ता की  अंधी दौड़ में शामिल हो गये !हर कोई नेता बनने के चक्कर में रहता था !
शिरोमणि कवि पंडित मांगेराम जी ने उन नेताओ का वर्णन निम्न प्रकार से किया है-

कोए कोमनिस्ट,कोए सोशलिस्ट,कोए लीग जमीदारा सै !रै लीडरी के मारे रोवैं यू मतलब सारा सै !!टेक!!


घर म्ह जूत लुगाई मारै,देखै बाट लीडरी की !बीस-तीस की गिणती कोन्या,गेल्याँ साठ लीडरी की !जेल म्ह जाकै करै कुर्बानी,ख़ुलरी हाट लीडरी की !ठग,डाकू,और चोर,लुटेरे,मारै डाट लीडरी की !डूब कै मर जाओ औ गद्दारों थारा कित का भाई चारा सै !!१!!रै लीडरी के मारे रोवैं यू मतलब सारा सै !!टेक!!


जवाहरलाल श्री गाँधी जी की,गेल बणा चाहवें सैं !कांटे कितने पैने कोन्या सेल बणा चाहवे सैं !चौकीदार भी मानै कोन्या पटेल बणा चाहवे सैं !जितने लंगड़े,लूले सारे रेल बणा चाहवे सैं !असम्बली की बात करै घरां कर्जे के 1800 !!२!!

रै लीडरी के मारे रोवैं यू मतलब सारा सै !!टेक!!


गाँधी जी नै न्यू सोची दिल ठंडे तै मानेगें !जवाहरलाल नै न्यू सोची कुछ झंडे तै मानेगें !अपणे भाई अपणी जनता प्रोपगंडे तै मानेगें !रिश्वत खोरी,ब्लैक करणीयां सब डंडे तै मानेगें !सोच समझ कै देख लियो यू राजपाट थारा सै !!३!!रै लीडरी के मारे रोवैं यू मतलब सारा सै !!टेक!!


लन्दन आले आच्छे लिकड़े देकै राज अलग होगे !600 रियासत भारत के म्ह देकै ताज अलग होगे !गेल्याँ रुक्के मारणियां थे सब दगा बाज अलग होगे !घर की ढोलक,घर का बाजा लेकै साज अलग होगे !मांगेराम थारा सुणता कोन्या फुटा होड़ नगारा सै !!रै लीडरी के मारे रोवैं यू मतलब सारा सै !!टेक!!
copyright 2012(c)

                                                                   all right reserved 




Shiromani Kavi Pandit Mange Ram Sangi

शिरोमणि कवि पंडित मांगेराम जी ने "क्रष्ण-सुदामा"नामक सांग बनाया था तो उस सांग की में १ रागनी और आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ !

रागनी तब की है जब सुदामा श्री क्रष्ण जी के पास पहुच जाते है तो अपने बचपन के मित्र को देखकर श्री क्रष्ण जी काफी खुश हो जाते हैं और अपनी पत्नी रुकमणी से क्या कहते है और पंडित जी ने लिख दिया -


पाणी तै ल्यादे रै रुक्मण,पाँ धोवेगा मेरा यार !!टेक!!


खड़ी-खड़ी के देखै मेरे मांह नै !
मैं ब्राह्मण की पूजा करूं छा  नै !
पाँ नै ठादे रै रुक्मण,कांटे काढूँगा दो-चार !!१!!
पाणी तै ल्यादे रै रुक्मण,पाँ धोवेगा मेरा यार !!टेक!!


मेरा इस ब्राहमण में हित सै !
इस में बालकपण तै चित सै !
कित सै राधे रै रुक्मण,पहर के मालसरी का हार !!२!!
पाणी तै ल्यादे रै रुक्मण,पाँ धोवेगा मेरा यार !!टेक!!


मन से बुरे भले की दब नै !
तू भजा कर सच्चे रब नै !
सबनै ताहदे रै रुक्मण,रणवांसा तै बाहर !!३!!
पाणी तै ल्यादे रै रुक्मण,पाँ धोवेगा मेरा यार !!टेक!!


न्यू सोची गुरु लख्मीचंद नै !
देंगे काट द्ल्द्र फंद नै !
छन्द नै गा दे रै रुक्मण,मीठा सारंगी का तार !!४!!
पाणी तै ल्यादे रै रुक्मण,पाँ धोवेगा मेरा यार !!टेक!!


copyright 2012,
all right reserved