हे रै कुछ ज्ञान रह्या ना दुनिया की चाल बिगाड़ी||टेक||
दीपचंद के खिमा कुतबी धौली चादर ओढया करते|
आडा-तिरछा ढुंगा मारै हाथ तले नै कोडा करते|
गोली किसा निशान लागै,तीन काफिए छोड्या करते|
खिमा तै सोरठ बनता फिर दीपचंद बणता बंजारा|
मरगे कुतबी मरगे कुतबी,मार दिया मेरे फटकारा|
बीजा बण कै आया करता बिन बजा कै सांग दिख्यारा|
दो नकली के तख्तां कै उपर बकते बात उघाड़ी||१||
हे रै कुछ ज्ञान रह्या ना दुनिया की चाल बिगाड़ी||टेक||
हरदेव तै राँझा बणता,चतरू की बनाई हीर|
सादिक के म्ह चाले काटे,कहते देखे मर्द और बीर|
मरगे चतरू मरगे चतरू,बोलां के मारै था तीर|
बाजे ने एक झम्मन पाला गिण कै डाक मराई तीन|
हाय मरगे हाय मरगे,आख्यां देख्या करो यकीन|
जमाल के नै कुरान पढ़ा कै दुनिया का बिगाडया दीन|
बहुत से माणस हीरामल नै पागल कहें अनाड़ी||२||
हे रै कुछ ज्ञान रह्या ना दुनिया की चाल बिगाड़ी||टेक||
दुनिया के म्ह शोर माच ग्या लकड़हारा गावण लाग्या|
मरगे दादा मरगे दादा,भर भर डोली ठावण लाग्या|
ब्होत सी दुनिया पाछे छोडी,नये नये सांग सुणावण लाग्या|
लख्मीचंद का माईचन्द था,काठ बैहल सी हाल्या करता|
बागां में नोटंकी बण कै ,खटोले से साल्या करता|
फेर आगे आगे नोटंकी अर पाछे बामण चाल्या करता|
लख्मीचंद माळी की बण कै बांध्या करता साडी||३||
हे रै कुछ ज्ञान रह्या ना दुनिया की चाल बिगाड़ी||टेक||
धनपत ने एक श्याम बणाया श्याम खटक गया सारा कै|
पाका श्याम डूम का छोरा काच्चा श्याम कुम्हारा कै|
सिलो सिलो कह कै बोले या लागे खटक गवारां कै|
आंग्लियाँ तै करें इशारे जा ली बलख बुखारे में|
सी -सी कर कै सांग करे जणु खाली मिर्च बिचारे नै|
मुह जळ ज्य़ा तै मीठा खा ले,ले अगले समझ इशारे नै|
ज्यानी चोर पै जोर लगा दिया धनपत पिछम पिछाड़ी||४||
हे रै कुछ ज्ञान रह्या ना दुनिया की चाल बिगाड़ी||टेक||
दत नगर का चन्द्र बादी तेली का एक लेरया छोरा|
करमु का कर्मबीर बणाया जिस पै बांगर पागल होरया|
मुह मरका कै करे इशारे आख्यां में स्याही का डोरा|
एक हीर के नै दीन बिगाडया हिन्दू रह्या ना मुसलमान|
बादियाँ कै होका पीवै जाने सै यो जगत जहान|
बनवारी का टीबा ठा कै दत नगर पड़वाये कान|
ही-ही करे जणु गादड़ बोले सारी फसल उजाड़ी||६||
हे रै कुछ ज्ञान रह्या ना दुनिया की चाल बिगाड़ी||टेक||
राम किशन माईराम का चेला,बेड़े बंद की पदवी थ्यागी|
दिन धौली पंसारी बण गया मुसे नै एक हल्दी पागी|
आँख मीच कै पड़ कै सोगया पाले नै तै बकरी खागी|
किसका पाला किसकी बकरी क्यों बण रह्या सै सहम रूखाला|
पन्मेशर का भजन करे ज्य़ा गळ में पहर काठ की माला|
ब्यास का ब्यास बणा रहग्या वो ब्यास बणे था नारनोंद आला|
यो धंधा तेरा चाले कोन्या तू टोह ले काम अगाड़ी||६||
हे रै कुछ ज्ञान रह्या ना दुनिया की चाल बिगाड़ी||टेक||
मांगेराम मसीता तेरा भाई का भाई रहग्या|
मांगेराम सूरजमल तेरा राही का राही रहग्या|
मांगेराम टेकचंद तेरा नाई का नाई रहग्या|
एक सरुपा अर एक कपूरा रोक्या खड़ें रकाने नै|
ध्रुव भगत अर क्रष्ण जन्म के ओटे कोण निशाने नै|
बाप और बेटी सुणों बैठ के या पट री जाण जमाने नै
कहे मांगेराम तेरा ज्ञान लुट गया तेरी खुली पड़ी किवाड़ी||७||
हे रै कुछ ज्ञान रह्या ना दुनिया की चाल बिगाड़ी||टेक||
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